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Navratri

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ByRuchi's Shayari

Apr 13, 2021
navratri

कथा के अनुसार नवरात्रि पर्व  

इस पर्व से जुड़ी एक अन्य कथा अनुसार देवी दुर्गा ने एक भैंस रूपी असुर अर्थात महिषासुर का वध किया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर के एकाग्र ध्यान से बाध्य होकर देवताओं ने उसे अजय होने का वरदान दे दिया। उसे वरदान देने के बाद देवताओं को चिंता हुई कि वह अब अपनी शक्ति का गलत प्रयोग करेगा,और प्रत्याशित प्रतिफल स्वरूप महिषासुर ने नरक का विस्तार स्वर्ग के द्वार तक कर दिया और उसके इस कृत्य को देख देवता विस्मय की स्थिति में आ गए। महिषासुर ने सूर्य, इन्द्र, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, यम, वरुण और अन्य देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए थे और स्वयं स्वर्गलोक का मालिक बन बैठा। देवताओं को महिषासुर के प्रकोप से पृथ्वी पर विचरण करना पड़ रहा था । तब महिषासुर के इस दुस्साहस से क्रोधित होकर देवताओं ने देवी दुर्गा की रचना की। ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा के निर्माण में सारे देवताओं का एक समान बल लगाया गया था। महिषासुर का नाश करने के लिए सभी देवताओं ने अपने अपने अस्त्र देवी दुर्गा को दिए थे और इन देवताओं के सम्मिलित प्रयास से देवी दुर्गा और बलवान हो गईं थी। इन नौ दिन देवी-महिषासुर संग्राम हुआ और अन्ततः महिषासुर-वध कर महिषासुर मर्दिनी कहलायीं।

कितनी बार मनाई जाती है नवरात्री ?

हिन्दू धर्म के अनुसार, एक वर्ष में चार नवरात्र होती है वर्ष के प्रथम मास अर्थात चैत्र में प्रथम नवरात्रि होती है चौथे माह अषाढ़ में दुसरी नवरात्र होती इनके बाद अश्विन मास में प्रमुख नवरात्र होती है.
इसी प्रकार वर्ष के ग्यारहवे महीने अर्थात माघ में भी गुप्त नवरात्री मानाने का उल्लेख एवं विधान देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथो में मिलता है.
अश्विन मास की नवरात्री सबसे प्रमुख मनी जाती है इस दौरान गरबों के माध्यम से माता की आराधना की जाती है. दूसरी प्रमुख नवरात्री चैत्र मास की होती है.
इन दोनों नवरात्रियों को क्रमशः शारदीय व वासंती नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है इन्हें इन्हें प्रकट नौरात्र भी का जाता है
इसके अतिरिक्त आषाढ़ तथा माघ मास की नवरात्री गुप्त रहती है इसके बारब में अधिक जानकारी नहीं होती इसीलिए इसे गुप्त नवरात्री कहते है.

चैत्र नवरात्रि 2021 की तिथियां

13 अप्रैल- नवरात्रि प्रतिपदा- मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
14 अप्रैल- नवरात्रि द्वितीया- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
15 अप्रैल- नवरात्रि तृतीया- मां चंद्रघंटा पूजा
16 अप्रैल- नवरात्रि चतुर्थी- मांकुष्मांडा पूजा
17 अप्रैल- नवरात्रि पंचमी- मां स्कंदमाता पूजा
18 अप्रैल- नवरात्रि षष्ठी- मां कात्यायनी पूजा
19 अप्रैल- नवरात्रि सप्तमी- मां कालरात्रि पूजा
20 अप्रैल- नवरात्रि अष्टमी- मां महागौरी
21 अप्रैल- नवरात्रि नवमी- मां सिद्धिदात्री , रामनवमी
22 अप्रैल- नवरात्रि दशमी- नवरात्रि पारणा

इसलिए मनाया जाता है नवरात्रि का त्योहार

इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा है। महिषासुर नाम का एक बड़ा ही शक्तिशाली राक्षस था। वो अमर होना चाहता था और उसी इच्छा के चलते उसने ब्रह्मा की कठोर तपस्या की। ब्रह्माजी उसकी तपस्या से खुश हुए और उसे दर्शन देकर कहा कि उसे जो भी वर चाहिए वो मांग सकता है। महिषासुर ने अपने लिए अमर होने का वरदान मांगा।

महिषासुर की ऐसी बात सुनकर ब्रह्मा जी बोले, ‘जो इस संसार में पैदा हुआ है उसकी मौत निश्चित है। इसलिए जीवन और मृत्यु को छोड़कर जो चाहो मांग लोग।’ ऐसा सुनकर महिषासुर ने कहा,’ ठीक है प्रभु, फिर मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि मेरी मृत्यु ना तो किसी देवता या असुर के हाथों हो और ना ही किसी मानव के हाथों। अगर हो तो किसी स्त्री के हाथों हो।’

महिषासुर की ऐसी बात सुनकर ब्रह्माजी ने तथास्तु कहा और चले गए। इसके बाद तो महिषासुर राक्षसों का राजा बन गया उसने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता घबरा गए। हालांकि उन्होंने एकजुट होकर महिषासुर का सामना किया जिसमें भगवान शिव और विष्णु ने भी उनका साथ दिया, लेकिन महिषासुर के हाथों सभी को पराजय का सामना करना पड़ा और देवलोक पर महिषासुर का राज हो गया।

महिषासुर से रक्षा करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के साथ आदि शक्ति की आराधना की। उन सभी के शरीर से एक दिव्य रोशनी निकली जिसने एक बेहद खूबसूरत अप्सरा के रूप में देवी दुर्गा का रूप धारण कर लिया। देवी दुर्गा को देख महिषासुर उन पर मोहित हो गया और उनसे शादी करने का प्रस्ताव सामने रखा। बार बार वो यही कोशिश करता।

देवी दुर्गा मान गईं लेकिन एक शर्त पर..उन्होंने कहा कि महिषासुर को उनसे लड़ाई में जीतना होगा। महिषासुर मान गया और फिर लड़ाई शुरू हो गई जो 9 दिनों तक चली। दसवें दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया…और तभी से ये नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।

नवरात्रि के उपलक्ष्य में क्या किया जाता है ? यह कैसे मनाया जाता है..

  • देवी पूजन
  • जवारे बोने
  • माता का श्रंगार
  • कलश स्थापना
  • नौ दिन के लिए हवन
  • अखंड ज्योति

पूजन सामग्री

देवी पूजन की सामग्री

माता की मूर्ति या तस्वीर की स्थापना के लिए चौकी.
चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पिला कपड़ा.
माँ पर चढाने के लिए लाल चुनरी या साड़ी.
पाठ के लिए “दुर्गासप्तशती” किताब.
कलश, आम के पत्ते, फुल माला,पान,सुपाड़ी,कपूर,रोली,सिंदूर,मौली और चावल.

जवारे का श्रुंगार

मिट्टी का बर्तन
साफ़ मिट्टी
जवारे बोने के लिए जो या गेहू
मिट्टी पर छिड़कने के लिए साफ़ जल
मिट्टी के पर्तन पर बंधने के लिए मौली

माता का श्रुंगार

लाल चूड़ी,
लाल चुनरी
बिछिया,
बिंदी
इत्र,
महावर मेहंदी
काजल
माहुर
कान की बाली
नेलपॉलिश
मंगल सूत्र
गजरा
नथनी
बाजूबन
पायल

नवरात्रि कलश स्थापना के लिए सामग्री

घट स्थापना के लिए मिट्टी, पीतल, तांबा का एक घड़ा। जयंती एवं पूजा के लिए जौ, तिल, सप्तमृतिका, सर्वोषधि, शहद, लाल वस्त् कुमकुम, पानी वाला नारियल, दीप, रोली, सुपारी, गंगाजल, आम का पत्ता.

नवरात्रि कलश स्थापना मंत्र

नवरात्रि में कलश स्थापित करने से पहले पूजा पर बैठकर सबसे पहले पूजा पर बैठकर सबसे पहले खुद को और पूजा सामग्री को मंत्र द्वारा पवित्र कर लेना चाहिए। पवित्र होने का मंत्र- ओम अपवित्र: पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ हाथ में कुश और जल लेकर इस मंत्र को पढ़ कर स्वयं पर और पूजन सामग्रियों पर जल के छींटे दें। इसके बाद दाएं हाथ में अक्षत, फूल, जल, पान, सिक्का और सुपारी लेकर नवरात्र दुर्गा पूजन के लिए संकल्प करें।

हवन सामग्री

हवन कुंड
आम की लकड़ी
सिंदूर, रोली
काले तिल
चावल
जौ (जवा )
धुप
चीनी
पांच मेवे
घी
लोबान
गुग्ल
लौंग का जौड़ा
कमल गट्टा
सुपारी
कपूर
हवन में चढाने के लिए प्रसाद की मिठाई
नौवमी को हलवा पूरी
सुद्ध जल

अखंड ज्योति

पीतल या मिट्टी का साफ़ दीपक
घी
लंबी पट्टी के लिए रुई या बत्ती
दीपक सजाने के लिए रोली या सिंदूर
दीपक के निचे रखने के लिए चावल

माँ दुर्गा का प्रथम दिन एवं स्वरूप ‘शैलपुत्री’

नवरात्री त्यौहार के पहले दिन रौशनी और जिवंत रंग ओरेंज (नारंगी)से होती है और खुसी का प्रतिक है और इसीलिए यह इस रंग के साथ नवरात्री शुरू करने के लिय्व पूर्ण समझ में आता है इसके आलावा, यह दिन हिन्दू देवी माता शैलपुत्री की पूजा करने का दिन है
माता शैलपुत्री पहाड़ो की बेटी है और इन्हें भवानी और हेमवती के नाम से भी जाना जाता है.

माँ ‘शैलपुत्री’ का मंत्र – shailputri

वन्दे वांछितलाभाय, चंद्रार्धकृतशेखराम्‌।

वृषारूढां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

मां दुर्गा का दूसरा दिन एवं स्वरूप ‘ब्रह्मचारिणी’

दुसरे दिन पूजा की सुरुआत पवित्र रंग सफ़ेद से होता है, ब्रम्ह्चारिणी कुंवारेपन को दर्शाती है और रंग सफ़ेद शुद्धता को दर्शाती है सफ़ेद रंग पवित्रता, शांति और ध्यान का भी प्रतिक है, प्रम्हाचारिणी माता को सफ़ेद पोशाख में सजाया जाता है , उन्हें दाहिने हाथ में एक जप माला और बाये हाथ में कमंडल होता है.

माँ ‘ब्रह्मचारिणी’ का मंत्र

दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू।देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

मां दुर्गा का तीसरा दिन एवं स्वरूप ‘चंद्रघंटा’

नवरात्री के तीसरे दिन लोग लाल वस्त्र पहनते है, यह सुन्दरता और निडरता का प्रतिक है इस दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है वह अपनी कृपा, बहादुरी और सहस के साथ लोगो को आशीर्वाद देने के लिए पूजी जाती है उनकी कृपा से भक्तो के सभी पाप, संकट,शरिरिक कष्ट, मानसिक कष्ट और भुत बधाये मिट जातियो है.
शिव पूरण के अनुसार,चंद्रघंटा चंद्रशेखर के रूप में भगवान शिव की शक्ति है.

मां ‘चंद्रघंटा’ का मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

मां दुर्गा का चौथा दिन एवं स्वरूप ‘कूष्मांडा’

नवरात्रि का चौथा दिन माँ कुशमांडा को समर्पित होता है किवंदतियों के अनुसार, यह कहा जाता है की देवी कुशमांडा ने अपनी खिलखिलाहट से सारे ब्रम्हांड का निर्माण किया और इसी कारण समस्त जगत उनकी आराधना करता है.

मां ‘कूष्मांडा’ का मंत्र

‘कूष्मांडा’वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥

नवरात्री का पांचवा दिन एवं स्वरूप ‘स्कंदमाता’

नवरात्रि के पांचवे दिन पूजा की शुरुआत खुश और रोशनी का प्रतीक पिला रंग से करे हिन्दू इस दिन देवी स्कंदमाता की पूजा करते है उनके नाम का पहला शब्द स्कन्द से आया है जो युद्ध के देवता कार्तिकेय का दूसरा नाम है इस प्रकार वह भगवान् कार्तिकेय या स्कन्द की माता के रूप में जानी जाती है.

मां ‘स्कंदमाता’ का मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

नवरात्री का छठा दिन एवं स्वरूप ‘कात्यायनी’

छठे दिन का रंग हरा है जो नई शुरुआत और विकास का प्रतीक है हिन्दू भक्त नवरात्री में छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा करते है उन्हें आत्याचारी दानव महिषासुर के विनाशक के रूप में भी पूजा जाता है माँ कात्यानी को शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है.

मां ‘कात्यायनी’ का मंत्र

 ओम देवी कात्यायन्यै नमः॥

 एत्तते वदनम साओमयम् लोचन त्रय भूषितम।

पातु नः सर्वभितिभ्य, कात्यायनी नमोस्तुते।। 

नवरात्री का सातवां दिन एवं स्वरूप ‘मां कालरात्रि’

सातवें दिन का रंग ग्रे है ग्रे बदलाव की ताकत का प्रतीक है लोग ग्रे रंग से भक्तों के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है.

मां ‘कालरात्रि का मंत्र

ज्वाला कराल अति उग्रम शेषा सुर सूदनम।

त्रिशूलम पातु नो भीते भद्रकाली नमोस्तुते।।

ओम देवी कालरात्र्यै नमः।

नवरात्री का आठवां दिन एवं स्वरूप ‘मां महागौरी’

नवरात्री का आठवां दिन आठ कंजक का दिन है बहुत से लोग इस दिन को छोटे-छोटे लडकियों को भोजन खिलाकर मानते है उन्हें देवी का अवतार माना जाता है इन दिन का रंग बैगनी है जो बुद्धि और शांति की शक्ति को दर्शाता है लोग इन दिन देवी महागौरी की पूजा करते है देवि महागौरी अपने भक्तो की सभी इच्छाओं को पूरा करने की शक्ति रखती है.

मां ‘महागौरी का मंत्र

श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

नवरात्री का नौवां दिन एवं स्वरूप ‘मां सिद्धिदात्री’

नवरात्री नौवे और आखरी दिन को नवमी कहा जाता है और यह नवरात्री उत्सव का आखरी दिन होता है, और देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, माना जाता है की रंग मोर रंग भक्तो की मनोकामना पूरी करता है, ऐसा माना जाता है की भगवान शिव के शारीर का एक हिस्सा देवी सिद्धिवात्री का है
इसीलिए, उन्हें अर्थ्नारेश्वर के नाम से भी जाना जाता है.

मां ‘सिद्धिदात्री का मंत्र

सिद्धगंधर्वयक्षाद्यै:, असुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात्, सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

Maa Druga Status

beshak pahan lo hamare jaise kapde aur zevar,
par kaha se laoge maata raanee ke bhakton vaale tevar.
बेशक पहन लो हमारे जैसे कपड़ें और ज़ेवर,
पर कहा से लाओगे माता रानी के भक्तों वाले तेवर.

hamari takat ka andaja hamare jor se nahi,
mata ke jayakare ke shor se pata chalata hain.
हमारी ताकत का अंदाजा हमारे जोर से नही,
माता के जयकारे के शोर से पता चलता हैं।

chalata raha hun agnipath par, chalata chala jaoonga,
maata raanee ke aasheervaad se manachaahee saphalata paunga.
चलता रहा हुँ अग्निपथ पर, चलता चला जाऊँगा,
माता रानी के आशीर्वाद से मनचाही सफलता पाउँगा।

maan durga ke charanon mein jab sheesh jhukaate hain,
saare museebaton se ladane ki taakat paate hain.
माँ दुर्गा के चरणों में जब शीश झुकाते हैं,
सारी मुसीबतों से लड़ने की ताकत पाते हैं.

maan ke darabaar jab bhee jaana,
thoda poony bhee kamaana,
gareebon ko daan dekar
maan ka aasheervaad paana.
माँ के दरबार जब भी जाना,
थोड़ा पूण्य भी कमाना,
गरीबों को दान देकर
माँ का आशीर्वाद पाना।

Sherawlai Ka Status

jarooree nahin kisee bade aadamee ka saath,
jarooree hai sir par sirf maan ambe ka haath.
जरूरी नहीं किसी बड़े आदमी का साथ,
जरूरी है सिर पर सिर्फ़ माँ अम्बे का हाथ।

jab tak hrday mein “main” tha
tab tak maan kee bhakti najar nahee aaee,
jab hrday mein “maan” samaee
meree duniya mein khushiya hee khushiya chhaee
जब तक हृदय में “मैं” था
तब तक माँ की भक्ति नजर नही आई,
जब हृदय में “माँ” समाई
मेरी दुनिया में खुशिया ही खुशिया छाई

sinh par savaar hokar jab maata raanee aatee hain,
sabake hrday mein khushiyon kee lahar daud jaatee hain.
सिंह पर सवार होकर जब माता रानी आती हैं,
सबके हृदय में खुशियों की लहर दौड़ जाती हैं।

maan kee aaraadhana ka ye parv hain,
maan ke nau roopon kee bhakti ka parv hain,
bigade kaam banaane ka parv hain,
bhakti ka diya dil mein jalaane ka parv hain.
माँ की आराधना का ये पर्व हैं,
माँ के नौ रूपों की भक्ति का पर्व हैं,
बिगड़े काम बनाने का पर्व हैं,
भक्ति का दिया दिल में जलाने का पर्व हैं।

mainne tera naam lekar hee saare kaam kiye hai maan,
aur log samajhate hai ki, banda bahut kismat vaala hai.
मैंने तेरा नाम लेकर ही सारे कामNavratri किये है माँ,
और लोग समझते है कि, बंदा बहुत किस्मत वाला है।

Whatsapp Status For Navratri

na gin kar diya na tol kar diya,
jab bhee diya sheronvaalee maan ne,
dil khol kar diya.
ना गिन कर दिया ना तोल कर दिया,
जब भी दिया शेरोंवाली माँ ने,
दिल खोल कर दिया।

divy hai aankhon ka noor, karati hai,
sankaton ko door, maan kee chhavi hai
niraali.navaraatri mein aai hai khushahaali.
दिव्य है आँखों का नूर, करती है,
संकटों को दूर, माँ की छवि है,
निराली, नवरात्रि में आई है खुशहाली।

shraddha bhaav kabhee kam na karana,
duhkh mein hansana gam na karana,
ghat-ghat kee maan jaananahaaree,
har lengee saaree peeda tumhaaree.
श्रद्धा भाव कभी कम ना करना,
दुःख में हँसना गम ना करना,
घट-घट की माँ जाननहारी,
हर लेंगी सारी पीड़ा तुम्हारी।

khushiyon mein jeeta hoon aur koee gam nahin hai,
maan kee bhakti kee daulat kisee daulat se kam nahin hai.
खुशियों में जीता हूँ और कोई गम नहीं है,
माँ की भक्ति की दौलत किसी दौलत से कम नहीं है.

navaraatron ke aagaman kee taiyaari,
raam-seeta ke milan kee taiyaari,
asaty par saty kee jeet kee taiyaari,
ho sabako aaj in pavitr tyauhaaron ki badhai.
नवरात्रों के आगमन की तैयारी,
राम-सीता के मिलन की तैयारी,
असत्य पर सत्य की जीत की तैयारी,
हो सबको आज इन पवित्र त्यौहारों की बधाई।

Navratri

Best Shayari For Navratri

Maa durga ka seer par hath ho,
Pure parivaar me khushiyo ka was ho,
Ghar me sukh shanti ka niwas ho,
Aapke jiwan me prakash hi prakash ho.
माँ दुर्गा का सीर पर हाथ हो,
पुरे परिवार में खुशियों का वास हो,
घर में सुख शांति का निवास हो,
आपके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो,

jagat paalanahaar hai maan, mukti ka dhaam hai maan, hamaaree bhakti ka aadhaar hai maan, sabakee raksha kee avataar hai maan..!

jagat paalanahaar hai maan, mukti ka dhaam hai maan, hamaaree bhakti ka aadhaar hai maan, sabakee raksha kee avataar hai maan..!
जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ..!

जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ..!

lakshmee jee ka haanth ho, sarasvatee jee ka saath ho, ganesh jee ka nivaas ho, aue maan durga ka aasheervaad ho.. is navaraatri aapake lie khushiyon ka paigaam ho..!
लक्ष्मी जी का हाँथ हो, सरस्वती जी का साथ हो, गणेश जी का निवास हो, औए माँ दुर्गा का आशीर्वाद हो.. इस नवरात्रि आपके लिए खुशियों का पैगाम हो..!

maan shakti ka vaas ho, sankaton ka naash ho, har ghar mein sukh shaanti ka vaas ho, navaraatri kee haardik shubhakaamanaen. jay maata dee!!
माँ शक्ति का वास हो, संकटों का नाश हो, हर घर में सुख शान्ति का वास हो, नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। जय माता दी!!

maata raanee varadaan na dena hamen, bas thoda sa pyaar dena hamen, tere charanon mein beete ye jeevan saara, ek bas yahee aasheervaad dena hamen. aap sab ko navaraatri kee shubh kaamanaayen.
माता रानी वरदान ना देना हमें, बस थोडा सा प्यार देना हमें, तेरे चरणों में बीते ये जीवन सारा, एक बस यही आशीर्वाद देना हमें। आप सब को नवरात्रि की शुभ कामनायें।

roothee hai to mana lenge, paas apane use bula lenge, maiya hai vo dil kee bholee, baaton mein use laga lenge, navratri ki shubhkamnayai
रूठी है तो मना लेंगे, पास अपने उसे बुला लेंगे, मैया है वो दिल की भोली, बातों में उसे लगा लेंगे.

maata tere charanon me bhent ham chadhaate hain kabhee naariyal to kabhee phool chadhaate hain aur jholiyaan bhar bhar ke tere dar se laate hain
माता तेरे चरणों मे भेंट हम चढ़ाते हैं कभी नारियल तो कभी फूल चढ़ाते हैं और झोलियाँ भर भर के तेरे दर से लाते हैं

ye maan meree gunaahon ko mere main kubool karata hoon moksh de de meree maan bas yahee aasha rakhata hoon

ए माँ मेरी गुनाहों को मेरे मैं कुबूल करता हूँ मोक्ष दे दे मेरी माँ बस यही आशा रखता हूँ

kisse kahaanee ban jaenge ham bhee kabhee rahamat hai teree maan paas hotee hai too to jeene mein junoon aata hai
किस्से कहानी बन जाएंगे हम भी कभी रहमत है तेरी माँ पास होती है तू तो जीने में जुनून आता है.

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